कल बेटी दिवस था इसका पता शाम को फेसबुक खोलने पर पता चला! हर किसी ने अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर बेटियों की फोटोज़ लगा रखी थी और शुभकामनाओं के ज्ञान झाड़ रहे थे लेकिन क्या अब बेटी दिवस मनाने के बाद आप दूसरों की बेटियों की इज्ज़त करना सीख गये? राह से गुजरती किसी की बेटी के प्रति अश्लिल कमेंट करना भूल गए? और दुसरो की बेटी को अपनी बेटी जैसी मानने लग गए?

शायद नही??? क्योंकि इसका कारण है आप व हम सब की अल्प व मंद सोच जो अपनी बिटिया और दूसरों की बिटिया के वक़्त गिरगिट की भांति अपना असली रंग प्रकट कर देती हैं।

सारा दोष हम अकेलो का नही है, इसमें वो समाज भी बराबरी के साथ हमारे संग खड़ा है जो लड़का-लड़की में भेदभाव, बेटा-बेटी में फर्क, अपने-पराये में व्यवहार परिवर्तन करना सिखाता है! इसलिए पहले उससे बदलना होगा तब हम सही मायने में बेटा या बेटी दिवस मना पाएंगे।

©संजय ग्वाला