तुम्हारे पैरों की #खनकती वो #पायल ओर घर की #चौघट को पार कर पहली बार अंदर प्रवेश करना, मन को आज भी #सुकून देता हैं। अपने घर को छोड़ कर #पिया के आंगन को #सजाना ओर उसे अपना बना लेना वाकई सीता के पुनः राम मिलन-सी ख़ुशी देता हैं।
तुम्हारे हाथ का वो स्पर्श ओर हाथ में हाथ थामकर चलना मानो #बरमुडा_ट्राइंगल में खो जाना! ओर बाहर निकलने की कल्पना तक ना करना... सच में विचित्र है, पर प्यारा-सा #ख़्वाब हैं।😊
कभी सोचा न था कि दो अनजान #बगिया के भौंरे एक पुष्प-गुच्छ पर यूं मिल कर एक हो जाएंगे क्योंकि तुम ठेहरी थोड़ी-सी वाचाल ओर मैं मरियल-सा शर्मिला😋 मानो खुद से ही कह रहा हूं कि चांद की #चांदनी के आगे तू तो #रौद्र रूप लिए सूर्य-सा विकराल प्रतीत हो रहा है, जिसके रोम-रोम में कई कल्पनाएं #गर किये हुए हैं।
कभी-कभी ख़्यालों में जब चांदनी-सी #चमक दमक उठ जाती थी तो दिल #झिझक सा जाता! क्योंकि ऐसी कोरी कल्पना से #मन रो जो देता था, शायद अब तक एक डर को पाले हुए जो था।
जब पल भर की #रश्मों से हम एक हुए तो नज़रे बस चोरी-चोरी तुम्हे ही ताड़ रही थी, पर किसी के आगोश में तो, मैं अब भी था इसलिए तो किसी ओर का मेरी ओर देखने पर आंखे झुक जो जाती थी। पर अंदर ही अंदर #प्रज्वलित एक नई ज्योत से सर्दी की उस #ठंडक में भी गर्म राहत नसीब हो रही थी, शायद वो प्यार का पहला #अहसास रहा होगा।
उसके बाद, पहली बार हमारा यूं एकांत में मिलना ओर तुम्हारा झुका हुआ #चेहरा, मानो कह रहा है कि इन #झुकी हुई #पलकों को उठाकर अपने बराबर-सा कर दो!
ओर प्यार भरी इस चाहत में मेरे #लब बस यही कह रहे हैं कि तुम #जूलियट बन जाओ, मैं #रोमियों बन जाता हूं!
#ओये_पगले मेरे #लब बस यही कह रहे हैं कि तुम मेरी #बाहों में आ जाओ, थक से गये होंगे! मैं तुम्हारे #बालों में हाथ घुमा कर आराम-सा #फील करवा देती हूं।😘
ओर सुबह बस... आपके शर्ट के ऊपर वाले बटन को लगा कर ओर #करीब हो जाना चाहती हूं।😚
©संजय ग्वाला


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