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आंखें खुली हो या बंद!
ऐ मेरे रहनुमा, कुछ तो बोल दो!
फिर कैसे मैं कह दूं, मेरा देश आबाद हो रहा है!
परेशान; जिंदगी से!
धधक रहा रक्त शिराओ का! (पुलवामा हमला 2019)
जीवन अब शेष नहीं...
हम अजनबी थे, किसी वक़्त उस दोराहे पर!
इश्क़ कर लो ना, क्यों कहते हो पता नहीं!
क्या तुम अंधे हो?
याद आते हैं वो बचपन के दिन!
मैं, बोल नही पाता हूं!
मैं कुछ, परेशान-सा हूं!
अभी होने को है सवेरा!
देखों सूरज डूब रहा है!
थोड़े कठिन हालात हैं!
कैसे मैं हंसू, कैसे मैं रोऊं।
काश मैं प्यार का इज़हार ना करता!
दिल फिर से जीने लगा!
 अरविंद का जनता दरबार
तुम गये क्या, शहर सुना कर गए!