तुम मिली, तो दिल की हसरतों ने विराम-सा ले लिया
पाकर तुम्हारा साथ इस जाहां में...
मैं तुम में ही हो लिया।

हम अजनबी थे, किसी वक़्त उस दोराहे पर...
अब जहां हाथों में हाथ डालकर चल लिया करते हैं।

कई घड़ियां बीती ओर उलझनें आई...
पर हम-तूम ना टूट सके क्योंकि लाखों दुआएं जो पाई।

हम एक-दूजे पे फिदा, अब भी कुछ इस तरह हो लेते हैं...
कोई दर्द पास आ जाएं तो, चुपके से रो लेते हैं।

हां हम अजनबी थे, किसी वक़्त उस दोराहे पर...

उदास जो हो जाऊं मैं, किसी पल तो...
तुम हजारों मिन्नतें करके, दिल बेहला देते हो
सच कहूं, तुम सात नही सैंकड़ों जन्मों का निभा देते हो।

ख्वाहिशें जो ग़र कर ले, किसी कोने में तो...
तुम फुसला के उसे, ढांढस बंधा के मना लेते हो।

हम तो फ़र्दा-ए-सोच में मशगूल से रहने लगे हैं...
एक तूम हो जो हमे हकीकत में संजोए रखते हो।

हां हम अजनबी थे...

उलझ जाऊं कभी शिकस्त-ए-ज़िंदगी के झंझाल में...
तुम पास आकर, हर काम सहल बना देती हो।

तुम मेरे लिए कोई हूर-सी मुरत हो...
बस गयी जो दिल में, वो प्यारी सी सूरत हो।

©संजय ग्वाला