अंधरी सुरंग से गुजर रहे हैं,
बाहर क्या हो रहा है, पता नहीं...
चलते जा रहे हैं(2) सरपट सी दौड़ती दुनिया में,
पास क्या हो रहा है पता नहीं...(2)
वो यूं करीब से गुजरने लगे(2) हमें अनदेखा करके,
मुँह ऊपर कर लिया उन्होंने, ठोकरे हम खाने लगे...(2)
कोनसा सितम वो हमपे ठाह रहे, कुछ ख़याल नही(2)
प्यार करते हो ओर कहते हो पता नहीं...(2)
जो यह आपकी झूलफे(2) कभी कानो पर रहा करती थीं,
अब हमारी मोहब्बत में, लटक मटक कर रही है...(2)
दिल में से गुजर रहे हो, ओर कहते हो पता नहीं...
अरे, क्यों नादां ए दिल को तरसाते हो साहब(2)
इश्क़ कर लो ना, क्यों कहते हो पता नहीं...(2)
हम तो आपकी ख़िदमत में, हर वक़्त हाजिर हैं(2)
क्यों दूसरों से कहते हो, उनका कुछ पता नहीं...(2)
अरे थोड़ी सी नजरे अपनी रूह पर भी डालो(2)
आंसू निकाल कर कहते हो, हमें कुछ पता नहीं...(2)
जब बल खा कर शरमाती हो,
पलके झुका कर मुस्कुराती हो,
तो फिर क्यों, प्यार के अहसास को दफ़न करने लग जाती हो,
इश्क़ कर लो ना, वक़्त का कुछ पता नहीं...(2)
हम तुम्हारी जरूरत को, किसी भी आयाम तक पूरा करेंगे(2)
तुम एक बार कह दो ना...(2)
हमें तुम से इश्क़ हैं, बाकी कुछ पता नहीं...(2)
© संजय ग्वाला


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