कैसे मैं हंसू, कैसे मैं रोऊं।
किसे मैं अपने, दिल की बात बताऊं॥
हर-पल मरता हूं, यहाँ गुटन मे।
किससे लड़-के अब मैं, वापस स्वतंत्रता लाऊं॥
यारो मर रहा हूं, पल भर अलक जगाओ।
ओर कुछ नही तो, 2-मिनट का मौन बुलाओ॥
मर ना जाये यार तेरा, इस बंधन से मुझे बचाओ।
दो पल की खुशियां देकर, मुझे स्वप्न दिखाओ॥
मर-ना जाये यार तेरा, इस बंधन से मुझे बचाओ!!
फिर मिलेंगे✍
©संजय ग्वाला


0 टिप्पणियाँ