अभी होने को है सवेरा!

इतनी जल्दी हार मत मान,
इतनी जल्दी मुड़ना न ठान।
संकल्प पथ देख रहा राह,
इसे असंभव कभी न जान।

देख संघर्ष देख सबका तप,
जो अपने पूर्वजों ने किया है।
हारा हुआ कब का मर गया,
निडर ही सम्मान से जीया है। 

हर मुश्किल से पार जायेगा तू,
कदम बढ़ाने में ना हिचकिचाना।
कुछ न मिला तो सीख लेगा,
चलता है जीतना और हार जाना।

तिनके तिनके के लिए लड़ा है
उस हर पंछी को मिलना है बसेरा।

हिम्मत मत हार,धीरज रख 'राम'
अभी होने को है एक नया सवेरा।

©रामनिवास भांबू