सुप्रभात; सबसे पहले आप सभी को 71 वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। आज का दिन रगों में जोश व आंखों में देश व देशवासियों के लिए कुछ कर गुजरने के जज्बे समान हैं, हां यह अलग बात है कि हम इसके ऊपर कितना अमल कर पाते हैं।
दैनिक दिनचर्या अनुसार सुबह उठते ही आधुनिकता की डिजिटल दुनिया में कदम रख दिया और सोशल मीडिया पर विचरण करने लगा।
फ़ेसबुक, ट्विटर या व्हाट्सएप; हर कही दोस्तों, सगे संबंधियों या देशप्रेमियों के दर्द-भरे देशभक्ति गीत वाले स्टेटस/फोटोज लगे हुए हैं, किसी में भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव को फांसी दी जा रही हैं, किसी मे चंद्रशेखर आजाद अपनी मूछों को ताव दे रहे हैं, तो किसी में भारत को सोने की चिड़िया के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, कही सनी देओल अपनी बुलंद आवाज़ से रोंगटे खड़े कर रहे हैं... सब लाजवाब हैं! एक फोटो/वीडियो को देखकर/सुनकर दूसरे पर चल पड़ते हैं लेकिन किसी ने इनमें बताये भाव, जज्बे व कुछ कर गुजरने के हौसले को समझा है?
हमारे द्वारा 15 अगस्त व 26 जनवरी के अलावा आजादी के उन वीर सपूतों के साहस व बलिदानों की कितनी लाज रखी जा रही हैं? ओर आजाद भारत की उस संकल्पना को कितना साकार किया जा रहा है जिसमें उनके देखें अखंड भारत, सर्वश्रेष्ठ भारत, सर्व प्रथम भारत व सर्व हितकारी भारत की ज्योत हो!
मन-मस्तिष्क सोचने लगा कि हम उनके बताए मार्गों पर कितने कदम चल रहे हैं...? शायद कुछ कदम भी नहीं!
आज जब चलचित्रों के माध्यम से उन वीरों के स्वरूप को देखता हूं तो लगता है उनकी आंखों में, रगों में ओर कतरे-कतरे में इस हिन्दुस्तां के लिए बहुत कुछ ओर भी था! जो अब तक नहीं हो पाया है।
आज भी उन वीरों की निगाहें हम सब टिकी हुई होगी कि कब हम सब बहन-बेटियों की इज्ज़त करना शुरू करेंगे! कब हम सब गरीब व आर्थिक रूप से कमजोर लोगों/परिवारों के अधिकारों की आवाजें उठानी शुरू करेंगे तथा उन्हें कंधे से कंधा मिलाकर चलने के लिए प्रोत्साहित करेंगे, संबल बनाएंगे! कब हम सब जाति, धर्म, वेशभूषा, लिंगभेद, भाई-भतीजावाद से ऊपर उठकर केवल ओर केवल भारत की सोचेंगे व यहां के लोगों की बात करेंगे!
लेकिन फिर भी उम्मीद है कि भारत का हर नागरिक इसे सर्व शक्तिमान व सर्वश्रेष्ठ बनाने में अपना जी-जान लगा देगा...
इसी के साथ आप सभी को आजादी की इस एक ओर नई सुबह की शुभकामनाएं।
जय हिंद | जय भारत | जय जवान | जय किसान
©संजय ग्वाला


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