कलेक्टर-ओ... #कलेक्टर_साहब😎 मंद-मंद पीछे से आवाज आई! मैं ध्यान ना देकर पैदल आगे अपने रस्ते बढ़ने लगा तभी एकाएक फिर से स्वर सुनाई देने लगे कि "ओ चश्मे वाले कलेक्टर बाबू" रुककर पीछे देखने लगा ही था कि एक नवयौवन से लबालब, मरियल-सी कन्या👩 अचानक से पास आ गई...

मेरी तो सांस ही गले में अटक गई क्योंकि उसके वो गुलाब की पंखुड़ियों से रसीले होंठ👄 बस मेरे होंठ से 3-4 इंच ही दूर थे तभी मैंने तत्परता दिखाते हुए उससे दूर हटने की कोशिश की क्योंकि मुझे मेरी पागल महबूबा👸 का ख्याल जो आ गया था, प्यार से नही😅 उसके गुस्से की वजह से, वो कल ही मेरा #नीम्बू #निचोड़ने वाली थी😟 बाल-बाल बचा था उसके कहर से #चापलूसी करके😜

कुछ संभलते हुए अब मैंने उस नशीली आंखों 👀 वाली से कह ही डाला कि #मोहतरमा मैं कलेक्टर नही हूं, इतने में वो बात काटते हुए बोल पड़ी... मेरे #छोना_बाबू😘 तुम्हीं मेरे प्रियवर कलेक्टर हो। मैंने पहली नज़र में ही तुम्हें अपना कलेक्टर😎 मान लिया।

#ग्यारह_शुक्रवार करने पर रब का शुक्र है कि तुम मुझे मिले😍 क्या तुम्हें कुछ भी #याद नहीं? तुम्हारी छुट्टियों में हम #चान्तरी पर बैठकर हाथों में हाथ थामकर #गुप्तगू किया करते थे? तुम जब #जोधपुर #Ship_House के करीब ठहरें थे तो पास के विश्नोई समाज में संचालित #पानी_पतासे वाले से मेरे लिए #पतासे लाया करते थे? ओर तुमने मुझे वादा भी किया था कि इस बार जब तुम्हारी #पोस्टिंग यू.पी. हो जायेगी तो तुम मुझे #बनारस वाला वो #रसीला_पान खिलाओगे, जिसे सोचकर ही मेरे मुंह से #लार टपकने लगती हैं😛

अब यह मत कहना तुम्हें कुछ भी याद नहीं है! मैं #कांपते हुए सोचने लगा कि यह #सेटिंग मैंने कब कर ली, मैं तो #अखण्ड #पत्नीव्रता नर हूं! तभी 4-5 आदमी आये और बोलने लगे कि भाई साहब यह अपने #पप्पू की #साइबेरिया वाली #मैम_साहिबा हैं जो पगला गई हैं👧 और भटककर आपके पास आ गई। मैंने भी गुस्सा😠 दिखाते हुए उनको कह दिया कि ले जा भई इस #पपिया_की_कलेक्टर को अभी बेवजह मुझें बिन मौसम #साइबेरियन_सारस बना देती🐤 यह तो अच्छा हुआ मैं #हार्दिक_पांड्या की तरह आज करके आया😋

©संजय ग्वाला