ठंडी हवाएं चल रही है, #मोर किसी झूठ को बार-बार दोहराके सच में बदलने की भांति आवाजें निकाल रहा है लेकिन लगता नही कामयाब होगा क्योंकि सुनने वाला तो अब #कलेक्टर की भांति अपनी धुन में ही #मस्त रहेगा😎 और शासकीय शक्तियों के साथ अपने मन की #करेगा।👻 मोर चाहें कितना ही #गिड़गिडाये पर एक अच्छी बात है कि इतने शोर-शराबे में भी #ढेन्कड़ी आराम से अपने जीवन-यापन के लिए #दाना चुग रही है जो कि उसके बड़े संयम को उजागर करता है, काश #इंसान भी #ढेन्कड़ी की तरह होते😉 एक #कलेक्टर है जो #नख़रे दिखा रहा है, अब मैं भी सोचने लगा हूं की #कलेक्टर कब बनुगा?
©संजय ग्वाला


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