आज मौसम बड़ा सुहाना हैं, आसमान में बादल छाए हुए है जो सच रूपी किरणों को अपने आगोश में लेने की बेवजह कोशिश कर रहे है परंतु #कामयाब नहीं हो पा रहे है क्योंकि सच को दबाने के लिए उनका फैलाया आँचल शायद #छोटा पड़ रहा है पर इस पकड़म-पकड़ाई के भी अलग #मज़े हैं।😂

ठंडी हवाएं चल रही है, #मोर किसी झूठ को बार-बार दोहराके सच में बदलने की भांति आवाजें निकाल रहा है लेकिन लगता नही कामयाब होगा क्योंकि सुनने वाला तो अब #कलेक्टर की भांति अपनी धुन में ही #मस्त रहेगा😎 और शासकीय शक्तियों के साथ अपने मन की #करेगा।👻 मोर चाहें कितना ही #गिड़गिडाये पर एक अच्छी बात है कि इतने शोर-शराबे में भी #ढेन्कड़ी आराम से अपने जीवन-यापन के लिए #दाना चुग रही है जो कि उसके बड़े संयम को उजागर करता है, काश #इंसान भी #ढेन्कड़ी की तरह होते😉 एक #कलेक्टर है जो #नख़रे दिखा रहा है, अब मैं भी सोचने लगा हूं की #कलेक्टर कब बनुगा?

©संजय ग्वाला