ब्लात्कार, अपनी सोच का, आदर्शों का, संस्कारों का ओर पारिवारिक रिश्तों का... इंसान कितना नीचे गिर गया है... जो आज हवस के आगे अपनी बहन-बेटियों को भी नही देख पा रहा है। गौर करने वाली बात है कि लोगों की कामुक्ता कितनी बढ़ रही है!
कोई भी दिन ऐसा नही जाता जब अखबारों में रेप की खबरें ना आती हो! शर्म आती है की रेप जैसे गिनोने कृत्यों को करने वाले लोगों के समाज का हम भी हिस्सा है।
एक बार सोच के तो देखो क्या बितती है रेप पीड़िता व उसके परिवार पर... आपकी क्षणिक संतुष्टि के कारण पीड़िता कितनी निर्बल हो जाती है, वह अपने रिश्तेदारों, दोस्तों व समाजवालों के सामने उस हौसले से खड़ी नही हो पाती है, जैसे दूसरे हो पाते हैं। ना ही घर बसा पाती है क्योंकि कोन करता है एक बलात्कारी लड़की के साथ शादी!
एक परिवार जो अपनी ठरक से चलता था, अब झुकी हुई गर्दन के आगे बढ़ता है, किसकी वजह से... हमारी गलत सोच की वजह से! वहसीपन जो अब हमारी नजरों में घुल चुका है, हमें बहन, बेटी, अच्छे व बुरे में फर्क करने ही नहीं देता हैं। हवस के आगे हम बौने नज़र आने लगे हैं।
दूसरी ओर जो रेप करता है उसके घरवालों के हाल-ए-बयां तो आप समझ ही सकते हैं, वो लोग तो जीवित होकर भी मरे हुए से बदत्तर हैं... एक मां जो बुढ़ापे में अपने बेटे का साथ चाहती हैं, उसे उसके बिना तड़प-तड़प कर जीना पड़ता है, वाकई कितना कठिन होता है यह दौर!
अभी कुछ दिनों पहले हैदराबाद की महिला डॉक्टर से गैंग रेप करके उसे जला दिया था, इन आरोपियों की औसत आयु 20-25 साल के बीच में थी, जिसमे से एक की तो 7-8 महीने पहले ही शादी हुई थी... अब आप सोचो उस आरोपी ने कितने लोगों के जीवन को नरक बना दिया... महिला डॉक्टर को इन निर्दयों की वजह से जान गवानी पड़ी, डॉक्टर व रेपिस्ट का परिवार ओर वो नवविवाहित स्त्री! सबका सबकुछ उजड़ गया।
ओर क्या लिखूं... दुष्टों के ऐसे कार्यों के आगे शब्द कम पड़ रहे हैं।
अंत में... सबको सन्मति दे भगवान!
©संजय ग्वाला


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