समय कितना बलवान हैं, कैसे यह किसी के साथ गुजारे हसीन लम्हों को एक पल में ही यादों में तब्दील कर देता है।
कल तक जो हमारे पास होता था, जिसके संग हम खिलखिलाकर बातें किया करते थे, सुख-दुःख के क्षणों को साथ बैठकर गुजारा करते थे!
आज उनके बिना भी कदम आगे बढ़ाया करते हैं। वाकई इससे महान कोई नही हैं। इसके आगे सब फ़िके नज़र आते हैं, यह चाहे तो खुद बिल्ली समान व हमें चूहें की भांति कर सकता है जिसके आगे चूहा बस रहम की भीख मांगता हुआ खड़ा प्रतीत होता हैं।
©संजय ग्वाला


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