असावरी गांव का सरपंच कैसा हो?
नमस्कार👏 कुछ दिनों बाद देश के विकास के आधार स्तम्भ यानी ग्राम पंचायतों के चुनाव होने वाले हैं, हर गाँव के लोगों का सपना होता है की अपना गांव विकसित हो, दूसरों के लिए पथप्रेरक हो व विकास के उच्चतम आयामों को हासिल करें लेकिन ऐसा हो नही पाता है क्योंकि हम गांव के प्रधान(सरपंच) को चुनने में लचीलापन दिखाते हैं या प्रलोभन के मायाजाल में भटक जाते हैं और फिर 5 साल ठोकरे खाते रहते हैं...
लेकिन इस बार जब हम सब वोट डालने जाए तो इस बात का आत्ममंथन करें कि अब हमें अगले 5 साल ठोकरे नही खानी हैं, पालतू जानवरों की भांति उनके पीछे दुम नही हिलानी हैं जो पहले कुछ और कहते हैं और बाद में करते कुछ और हैं।
अबकी बार अपने गांव में सरपंच पद के उम्मीदवारों की झड़ी लगी हुई हैं लेकिन हमें बस एक ऐसे योग्य उम्मीदवार का चयन करना है जो गांव के मूलभूत विकास के मुद्दों को लेकर खड़ा हो और उन्हें पूरा करने में सक्षम दिखता हो! क्योंकि कई ऐसे लोग होते हैं जो जीतने के बाद अपने विरोधी के बाड़े में खड़े होकर गोबर करने लग जाते हैं, वह भूल जाते हैं कि जिन्होंने उन्हें जिताया था, इसी विरोधी को हराकर जिताया था! जिसके बाड़े में तू आज अपना फ़लसफ़ा बिखेर रहा है...
गांव के कुछ मुद्दे हैं... जो सभी लोग चाहते हैं कि चुनाव लड़ने वाला उन्हें पूरा करें या पूरा करने वाला चुनाव लड़े व जीते👇
तो सर्वप्रथम या पहले मुद्दे के रूप में हम नव चयनित सरपंच से यही चाहेंगे कि वह पंचायत के सभी गांवों में पीने के पानी की व्यवस्था सुचारू रूप से करें, वो भी जल्द से जल्द क्योंकी पानी की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है और लोग मजबूरी में 500 से 600 रुपये में 10-15 दिन के अंतराल से पानी का टैंकर मंगवाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं!
दूसरा मुद्दा यह है कि गांव के माध्यमिक विद्यालय की हालत बेहद ही खराब हो चुकी है, कई बार अखबारों में भी प्रकाशित हो चुका है कि भवन लगभग पूर्णतः छतिग्रस्त हो चुका है, तो नव चयनित सरपंच हम चाहेंगे कि या तो वह संपूर्ण भवन की मरम्मत करवाएं या फिर राजनीति के साम-दाम-दंड-भेद लगा कर विद्यालय भवन का नव निर्माण करवाएं।
तीसरा व अहम मुद्दा यह है की कई बार सरपंच पंचायत के जिस गांव का होता है वह केवल उसी गांव का विकास करवाता है, बाकी के गांव को भूल जाता है, तो नव चयनित सरपंच से उम्मीद रहेगी कि वे चाहे पंचायत के किसी भी गांव से खड़ा हो लेकिन सभी गांवों को एक समान व बराबर की नजरों से देखें।
चौथा मुद्दा यूं है कि पंचायत के लगभग सभी गांवों में गोचर भूमि पर अतिक्रमण लगातार बढ़ता ही जा रहा है जिसके कारण आवारा व गोशाला के पशुओं के चारे की दिक्कतें पैदा हो रही है और वह मजबूरी में किसानों के खेतों में डेरा डाल रहे हैं तथा फसलें नष्ट कर रहे हैं, तो नव चयनित सरपंच से उम्मीद रहेगी कि वह अपने वोट बैंक की परवाह न करते हुए पंचायत की कीमती जमीनों को जल्द से जल्द अतिक्रमण से मुक्त करवाएगा।
पांचवा मुद्दा असावरी के गौशाला के संबंध में है, जो अब लगभग बिना देखरेख के राम भरोसे चल रहा है व राजनीति का अखाड़ा बन चुका है तो, नव चयनित सरपंच से निवेदन रहेगा कि वह मौजूदा समिति को भंग करके या करवाकर नई समिति नवगठित करेगा/करवाएगा और गौशाला को एक नया रूप प्रदान करेगा।
छठा मुद्दा नरेगा में जो दलाली का सिस्टम चल रहा है वहां जमे हुए कुछ पुराने रसूखदाराओं द्वारा तो, नव चयनित सरपंच से उम्मीद करते हैं कि वह उन्हें हटा कर या एक तरफ धकेलकर नए व बेरोजगार लोगों को मौका दिलवाने का प्रयास करेंगे।
सातवां मुद्दा, गांव से संबंधित जो भी अधिकारी व कर्मचारी जुड़े हैं जैसे- पटवारी, ग्रामसेवक अरे माफ कीजिएगा अब यह महाशय ग्राम विकास अधिकारी बन गए हैं, पोस्टमैन, अध्यापक व चिकित्साकर्मी की उपस्थिति, नव चयनित सरपंच सुनिश्चित करें या करवाएं ताकि आमजन को किसी प्रकार की दुविधा ना हो। इसी मुद्दे में नव चयनित सरपंच रात्रि कालीन चिकित्सा कर्मी के संबंध में गौर करें क्योंकि लोगों को चिकित्सा सेवाएं समय पर व सही प्रकार से नहीं मिल पा रही है।
आठवां मुद्दा, पंचायत की योजनाओं व नए क्रियाकलापों की सूचनाओं के अभाव के संबंध में है, तो नव चयनित सरपंच से चाहेंगे कि वह पंचायत स्तर पर एक ऐसा सिस्टम बनाएं की पंचायत के संबंध में जो भी कार्य हो रहे हैं या योजनाएं आ रही है, की जानकारी लोगों तक उचित समय पर पहुंचे।
नौवां मुद्दा, नव चयनित सरपंच से चाहेंगे कि वो पंचायत का जो अधिकृत ई मित्र सेवा केंद्र है, उससे सभी लोगों को लागत मूल्य पर सेवाएं उपलब्ध करवाने का संकल्प करें ताकि आमजन ईमित्र संचालकों की लूटमारी से मुक्त हो सके।
दसवां मुद्दा, सभी लोग चाहेंगे कि पंचायत का जो मुखिया हो वह नियमित रूप से ग्राम सभाओं का आयोजन पंचायती राज कानून के तहत समय-समय पर करें ताकि पंचायत में जो कुछ चल रहा है उससे लोग अवगत हो सकें।
ग्यारहवां और सबसे अहम-अहम मुद्दा, जिसके बल पर ही मैं वोट करूंगा तो, जो भी प्रत्याशी खड़ा हो... उससे चाहेंगे कि वह अपने व पंचायत के सभी कार्यालयों में "सूचना का अधिकार कानून, 2005" को लागू करवाने का संकल्प करें व आरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 4(1) के तहत अपने कार्यालय की सूचनाएं स्वयं प्रकाशित करें तथा इस अधिनियम के तहत मांगी जाने वाली सभी सूचनाओं को सुनिश्चित तरीके से अदा करने का आह्वान करें।
तो मैं संजय ग्वाला आप सभी से चाहूंगा कि आप सब इस चुनाव में पक्षपात, परिवारवाद, प्रलोभन, डर व ऊंच-निच से ऊपर उठकर, मुद्दों पर खरे उतरने वालों के पक्ष में वोट करें ताकि सबका विकास व कल्याण हो।
जय हिंद | जय भारत


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