
जब तुम घर के दरवाजे से निकलती हो।
मेरे दिल को धड़काती हो॥
जब तुम पलके झुका-के शरमाती हो।
मेरे "सिने" मे आग लगाती हो॥
तुम्हारी माँ हम दोनो के बीच आती है।
मेरी हालत खराब करके वापस जाती है॥
जब तुम मेरी नजरो के सामने आयी।
मेरे दिल ने अन्दर "खलबली" मचाई॥
मैने God से Request लगाई।
तुम्हे मेरी Sister ने भाभी है बनाई॥
मैँ तुम्हारे लिये "बारिश" मे भीगा-भीगा आया।
तुम्हे दुकान पर Photocopy कराते पाया॥
मैने वापस अपने "क्वार्टर" का रास्ता पकड़ा।
तुमने मेरे दिल को अपने हाथो मे जकड़ा॥
तुमने यह प्यार का रूख उल्टा क्यो मोड़ा।
Bewafa बन-के मेरे दिल को क्यो तोड़ा॥
जा रहा हुँ मैँ तुमसे बहुत दुर।
तुम्हे Bewafai मे रोने के लिये कर दुँगा मजबुर॥
आयेगी तुम्हे हर पल मेरी याद।
तङप कर God से मुझसे मिलने की करोगी फरीयाद॥
क्योकी अभी मुझे आ रही है बस तुम्हारी याद, याद, याद!!
फिर मिलेंगे✍
©संजय ग्वाला

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