दर्द जिंदगी में!






हर किसी की जिंदगी में दर्द होता है, कोई उसे हंस के सहन करता है, तो कोई आंसुओं के संग बहाता है।

कुछ लोग कहते हैं कि दर्द गरीबी के कारण है लेकिन क्या जो गरीब नहीं है उन्हें दर्द नहीं होता? उन्हे भी दर्द का एहसास तो होता होगा लेकिन उनके दुख-दर्द का कारण शायद गरीबी नहीं होती होगी यह हम कह सकते हैं।

कभी-कभी मैं सोचता हुँ की भगवान ने सारा दुख मुझे ही क्यों दिया लेकिन हम यह भूल जाते हैं कि क्या वह दुखी नहीं जिनके बच्चे सड़को पर रात गुजारते हैं, क्या वह दुखी नहीं जो किसी के तलवे साफ करते हैं, क्या जो सड़क पर कटोरा लेकर बैठ जाते हैं वह दुखी नहीं हैं, सब जगह दुख है लेकिन दुखो के मायने बदल जाते हैं।

आज के जमाने में हर कोई दर्द से करहा उठता है उदाहरण के लिए हम कह सकते हैं- एक प्रेमी अपनी प्रेमिका के रूठने से दुखी हैं, तो कई ऐसी औलादें भी है जो अपने मां-बाप से दुखी हैं, तो कोई मां-बाप है जो अपनी औलाद की गलत संगत से दुखी है।

किसी बिजनेस-मेन के शेयर गिर रहे हैं, तो किसी की सरकार गिर रही हैं।

यहाँ हर तरफ दुख का साया है इसलिये कोशिश करते रहो ओर किसी दुख-दर्द को दिल पे ना ले।।

फिर मिलेंगे✍

©संजय ग्वाला

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