हम सब को मिलकर, अब संघर्ष नया उठाना हैं
किसान कौम की आवाज को, हुक्मरानों तक ले जाना है
बदलनी है इस बार, सोच-ए-जातिवाद की

लड़ रहा यह एक लड़ाई, आपके स्वाभिमान की...

जन-जन का भला हो, यह ललकार अब उठाएंगे
पकड़ मसाल हाथ में, अंधेरे को चीर जाएंगे
हिला देंगे तख्त-ए-ताज, तुम्हारी हैसियत का
तुम जितना हमकों रोकोगे, हम उतना आगे बढ़ जाएंगे

लड़ रहा यह एक लड़ाई, आपके स्वाभिमान की...

जो वादे करते हैं, बिन मौसम सावन लाने का
इस बार उन्हें विकास लाकर दिखाना है
ताल ठोक कर कहदो सबको, महावीर को जीताना हैं(2)

लड़ रहा यह एक लड़ाई, आपके स्वाभिमान की...

वो लाठी लेकर चलने वाले, कब तक साथ निभाएंगे
अपना घर भरकर, तीर्थ पे चले जायेंगे
तुम्हें देकर झूठों का पुलिंदा, वो दो चार हो जाएंगे

लड़ रहा यह एक लड़ाई, आपके स्वाभिमान की...

यह जहां बुलाया है वहां आया है, जहां बुलाओगे वहां आयेगा
कंधे से कंधा मिलाकर, साथ सबका निभायेगा
तो भरलो हुंकार इस बार दिल में, कि दुश्मनों को हराना हैं
बुलंद कर लो आवाज, महावीर को जीताना हैं(2)

लड़ रहा यह एक लड़ाई, आपके स्वाभिमान की...

वो इधर-उधर टहलायेंगे, फिर तुम्हें बेहलायेंगे
लेकिन इस बार तुम्हें टस से मस ना होना है
इस सर्द ट्वेंटी-ट्वेंटी में वनडे खेल जाना है
कहदो सबको, इस बार महावीर को जिताना हैं(2)

लड़ रहा यह एक लड़ाई, आपके स्वाभिमान की...

वो औरों के कामों को, अपना बता चिल्लायेंगे
अपनी हार देखकर, तुम पर झलल्यांगे
लेकिन तुम्हें उनके मुंह, पर यह बोल कर आना है
सुन ले ताऊ, इस बार हमें महावीर को जिताना हैं(2)

लड़ रहा यह एक लड़ाई, आपके स्वाभिमान की...

©संजय ग्वाला