न्यूज़ मीडिया का राजनीतिकरण




नमस्कार, आजकल के टीवी डिबेट्स को सुनकर ऐसा लगता है की जैसे सारे गद्दार, देशद्रोही, हत्यारे ओर भ्रष्टाचारी एकदम से उभर कर आ गये है क्योंकि किसी भी न्यूज़ चैनल को लगाओ तो ऐसा लगता है कि भारत देश में गृह-युद्ध के हालात पैदा हो गए हैं।

एक तरफ हम ये कहे कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानि मीडिया को कुछ ज्यादा बोलने की आजादी दी गई है तो शायद ये उन सभी चैनलों के लिए गलत व अन्यायपूर्ण होगा क्योंकि ऐसे कुछ ही चैनल होंगे जो अपने बोलने व दिखाने की आजादी से अधिक बोलते ओर दिखाते हैं, शायद यह इसीलिए होता होगा कि कुछ चैनलों को राजनीतिक सपोर्ट प्राप्त होता है।

आज के इस दौर में जहां सारे न्यूज़ चैनलस् TRP की दौड़ में आगे रहना चाहते हैं तो कुछ ऐसे भी है जो TRP से ज्यादा राष्ट्रीयता को महत्व देते हैं। कुछ चैनलों की वजह से सारे न्यूज़ चैनलों पर सवालिया निशान पैदा हो गया है की कौन-सा चैनल निष्पक्ष है या कौन-सा नहीं है? क्या वह चैनल निष्पक्ष हो सकता है जिसका हेड किसी राजनीतिक पार्टी के चुनाव चिन्ह से चुनाव जीतता है या वह चैनल निष्पक्ष हो सकता है जिसका चीफ एडिटर रिश्वत मांगते हुए कैमरे में कैद होता है या वह चैनल ज्यादा निष्पक्ष है जो देशद्रोही को प्रकट करें तथा अपने नाम के आगे देशभक्ति का ठप्पा लगाए, यह सारे सवाल सिर में बवाल पैदा कर देते हैं फिर भी इन(एक तरह से खरीदे हुए) चैनलों पर बैन नहीं लगता है, यह बड़ी शर्म की बात है। अभी Ndtv_India पर 9 नवंबर के लिए 24 घण्टे के लिये बैन लगाने का फैसला किया था क्योंकि उसने पठानकोट हमले के अगले दिन यह दिखा दिया था कि सेना किस तरह से अपनी कार्रवाई कर रही है, वहां पर क्या चल रहा है! यह सब कहना है बैन लगाने वाली संस्था का।

सोशल मीडिया पर सरकार के इस फैसले की आलोचना होने पर इस फैसले को वापस लिया गया। मैं इस बात से सहमत हूं कि देशहित के आगे कोई हित नहीं हो सकता इसीलिए उन चैनलों पर बैन लगना चाहिए लेकिन एक सवाल मेरे मन में बार-बार घूम रहा है कि उन न्यूज़ चैनलों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती जो फर्जी वीडियो दिखाते हैं या जो सांप्रदायिक भेदभाव/घटनाओं के लिए जिम्मेदार होते हैं या जो अपने फायदे के लिए नकली मुहिमे चलाते हैं। खैर अगर हम यह कहे कि हम आम आदमी या जनता है और हमें इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता है तो रुकिऐ हुजूर! इन्हीं गलत बातों की वजह से भेदभाव पैदा होता है(खासकर हिंदू-मुस्लिम में), सांप्रदायिक दंगे होते हैं जिससे लोग बेवजह मरते हैं, सरकारी नुकसान होता है, किसी गलत छवि वाले नेता या आदमी को चरित्रवान बनाया जाता है, इसीलिए हमें इनके खिलाफ़ आवाज उठानी चाहिए और इन्हें फलने-फूलने से रोकना चाहिए।

भगत सिंह की एक बात याद आती है जिसमें उन्होंने कहा था कि "जो चीज़ आज़ाद विचारों को बर्दाश्त नहीं कर सकती, उसे समाप्त हो जाना चाहिए" यही बात शायद आज के समय में लागू होती है।

फिर मिलेंगे✍

©संजय ग्वाला

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