तड़पकर इस दिल से शायद यही आहें निकल रही है कि मैंने ऐसा कौन सा गुनाह किया जो मुझे इस तरह की सजा मिल रही है... ना मैंने कुछ लिया है ओर ना ही मैं कुछ ले कर जाऊंगी क्योकी पल दो पल की मेरी जिंदगी शरीर को छोड़ कर चली जाएगी लेकिन एक सवाल मेरे मन में शायद हमेशा रहेगा कि जब मैं जन्मी थी तब आपने लोगों से कहा कि हमारी गाय ने बछड़ी को जन्म दिया है... आपने खुशियां मनाई... आपने मेरी मां का दूध पिया... आपने छाछ पी... आपने घी खाया और आखिर मे कुछ पैसों के लिए मेरी मां की दलाली कर दी और मुझे अकेली बनाकर गलियों में दर-बदर ठोकरे खाने के लिए छोड़ दिया... अब जब मैं अकेली हुं... मुझे आपकी जरूरत है तो पता नहीं आप कहां ओर किस काम मे खो गये... आप कही चले जाते तो मुझे इतना दुख़ नही होता क्योंकि आप हर सुबह-शाम मेरे सामने से गुजरते हो... मुझे तड़पती देखते हो फिर भी कठोर ह्रदय बना कर निकल जाते हो... क्या मैं आपकी बेटी जैसी नही नहीं हूं... क्या आपने मुझे नहीं पाला था... क्या मैं आपके परिवार की सदस्य नही हूं या नही थी? यह सवाल मेरे मन मे बार-बार आता है परंतु इसका जवाब मुझे आखिर तक नहीं मिलता है।
मुझे पता है मेरे जाने के बाद आप सभी से कहोगे कि बेचारी कितनी अच्छी थी, किस्मत ले गयी इसे अपने साथ ओर वक्त के आगे क्या कर सकते हैं... यही आप दुनियावालों से कहोगे ना!! आज मैं अपने अंत: दिल से सोचती हूं तो मुझे लगता है की अपनों से ज्यादा तो पराये अच्छे होते है जिन्होंने मेरे लिए डॉक्टर को बुलाया, इंजेक्शन लगवाये, मुझे पानी पिलाया लकिन हां यह अलग बात है कि इन सब का मुझ पर कोई असर ना हुआ क्योंकि शायद रब ने अब मुझे अपने पास बुला लिया है परन्तु मेरी दुआएं खाली नहीं जाएगी... जिन्होंने मेरी सहायता की है, जिन्होंने आखिर तक मेरा साथ दिया... मैं तो चली जाऊंगी लेकिन ऊपर जाकर रब से यही विनती करूंगी की है रब अगर किसी ने कोई पाप किया या कोई गलती की है तो उसें जानवर ना बनाना और अगर आप किसी को इंसान भी बनाऐ तो सभी को एक जैसा बनाना... ऐसा मत करना कि किसी को मानवता दें और किसी को मानवता नहीं दें क्योंकि एक अकेला मानवतावादी इंसान क्या कर सकता है, वह बेचारा हमारी सहायता के लिए बस अपनी अनमोल नेत्रों से आंसु से निकाल सकता है या हमें देख कर दया का भाव ला सकता है या हमारे इर्द-गिर्द घूम सकता है या हमें थोड़ा-सा सहारा दे सकते हैं या धूप आए तो छाया में ले जा सकता है या फिर मक्खियां परेशान करे तो उन्हें उड़ा सकता है ओर अपने दिल की तसल्ली के लिए हमें पानी पिला सकता है या हमारी दर्द भरी आवाज़े सुनकर दोड़ा हुआ हमारे पास आ सकता हैं बस इसके आगे वो क्या कर सकता है... और मेरी इंसानों से भी अपील है कि अगर आप किसी पशु या जानवर को संभाल नहीं सकते तो उनके साथ यूज एंड थ्रो वाली पॉलिसी ना अपनाये।।
फिर मिलेंगे✍
©संजय ग्वाला


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