किसी ने हमसे पूछा की कौन-सी दुनिया में रह रहे हो?
हमने भी कह दिया ख्यालों की दुनिया में!
वो थोड़े झिझके ओर पूछ बैठे, क्यों?
प्रत्युत्तर में हम भी बोल पड़े कि वो सबसे बेहतर है, जहां ना कोई रोक है ओर ना ही टोक है।
............................................. बस हमारा ही कैटवॉक हैं।
वो फिर पूछ बैठें कैसे "जी" लेते हो ऐसी जिंदगी?
हमें भी कुछ कहना तो था ही इसलिए आदाब कर बैठें की दुश्मनी व गिले-शिकवे से तो एकांत भला हैं।
वो थोड़े से सहमे, शायद वास्तविकता से रूबरू हो गए ओर बात का अंत करते हुए कह गये "अच्छा" हैं।
फिर मिलेंगे✍
©संजय ग्वाला


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