बदलिये अपनी सोच को!




मुबारक हो आप सभी को, आजादी की यह नई सुबह! आज का दिन कई महापुरुषों के बलिदान की बदोलत हासिल हुआ है, जिन्होंने अपनी जवानी, खुशियां, परिवार सब कुछ इस मातृभूमि पर न्योछावर कर दिया।

किसके लिए? हमारे व आने वाली पीढ़ियों के लिए! लेकिन कभी हमनें सोचा है, कि उन बलिदानियों के लिए हम लोगों ने क्या किया! उनके दिखाये पथ पर कभी एक कदम भी चले हैं! उन्होंने तो अपना सब कुछ त्याग दिया, हमने कभी एक पल भी निकाला है इस देश की मिट्टी के लिए! शायद नही, क्योंकि हम महत्वकांक्षी हो चले हैं, सिर्फ अपने बारे में ही सोचने लगे हैं, हमें अपने देश के नागरिकों के दुःख दर्द दिखाई नहीं देते है।

जर्जर हो चुकी कानून व्यवस्था, सिस्टम की लाचारी, समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, कुरीतियां, सरकारी कर्मचारियों की उदासीनता व सर्वहितकारी अधिकारों की बात आने पर हम पीठ करके खड़े हो जाते हैं, क्यों? इसका कारण है कि हमारी सोच! जो अब अल्प हो चुकी है, उसे अपने हित के अलावा कुछ सूझता ही नहीं है, अपने घर के सिवाय उसे औरों का मकां नही दिखता है।

लेकिन अगर ऐसे ही हम बनें रहे तो बहुत जल्द अपने अधिकारों की आजादी खो देंगे, शर्मिंदा कर देंगे उन वीरों के शौर्य को ओर धूमिल कर देंगे उनके बलिदान को! सिर्फ ओर सिर्फ अपने स्वार्थ की बदोलत।

बदलनी होगी हमें अपनी सोच, जागरूक होना होगा अपने अधिकारों के प्रति, बुलंद करनी होगी आवाज़ सबके हित ओर आने वाले वक्त के लिए! नही तो इस आजादी का कोई औचित्य नहीं है, व्यर्थ चले जायेंगे उन महावीरों के बलिदान। 

©संजय ग्वाला

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