काफी दिनों से सोच रहा था की क्यों ना कुछ लिखूं! लेकिन किस विषय पर लिखूं यह चिंता खाए जा रही है।
अगर मैं किसी नेता पर भला-बुरा लिखता हूं तो या तो वो बुरा मान जाएंगे या फिर उनके विपक्षी। कुछ देर झपकी लेने के बाद ख्याल आया की क्यों ना आज के मीडिया पर व्यंग्य कर दूं लेकिन चाहने-वाले बोलते हैं की बेटा मीडिया के बारे में लिखना रहने दे, वरना तेरा यह बदसूरत-सा चेहरा हर वक्त हमें और पड़ोसियों को टीवी पर देखना पड़ेगा। अपनों से ऐसी बातें सुनकर चेहरा मायूस, मन निराश और दिल बेचैन हो गया लेकिन निराशा के बीच एक आशा की किरण भी दिखी कि क्यों ना मैं सरकारों की योजनाओं, किसान हितेषी कार्यक्रमों व प्रोत्साहनों के बारे में लिखूं और लोगों को अवगत कराओ कि हमारी सरकारें अपनी प्रजा के लिए कितने अच्छे-अच्छे कदम उठा रही है तभी विचार आया कि सरकार के कौन से कदम ज्यादा अच्छे थे! क्या किसानों की ख़ुदकुशी करना या ख़ुदकुशीयों पर नेताओं के भाषण देना- कि यह तो विधि का विधान है जो आया है सो जाएगा।
सोचते-सोचते मैं विदेश पहुंच गया, वहां मुझे किसी ने बताया कि आपकी वो मंत्री कितनी अच्छी है😊 खूब मदद करती है लोगों की। यह सुनते ही मैंने ठंडी गहरी सांस ली और निश्चित हो गया की सरकार के एक मंत्री का यह कदम कितना सहारनिय है और इस अच्छे काम के बदले मुझे इनके बारे में कुछ तो लिखना चाहिए, पर अच्छा काम किया किया है? यह जानने के लिए मैंने टीवी पर एक न्यूज़ चैनल लगाया और एंकर ने उनके आज-तक के अच्छे कामों के बारे में बताया तो मैं हक्का-बक्का खुशी के मारे ऊपर-नीचे लहराने लगा, तभी विपक्षियों ने ट्वीट पर ट्वीट करके मेरे अरमानों पर पानी फेर दिया और मंत्री के अच्छे कामों का दिवाला निकाल दिया। लेकिन मैंने हार नही मानी और ठान लिया कि अब देशभक्ति पर लिखूंगा तभी दिमाग सनका की कौन-सी व किसकी देशभक्ति पर लिखूं क्या पाक के जनरल शरीफ पर लिखूं जो एक कश्मीर के लिए अपने हजारों सैनिकों की बली देता है या अटल जी के बारे में लिखूं जिन्होंने दूसरे देश में भी अपनी भक्ति दिखाई और जीता हुआ लाहौर भी दान कर आए या फिर उन चीनियों के बारे में लिखूं जिन्होंने ऐसी देशभक्ति दिखाई की दूसरे देश की सीमा को ही हड़प लिया। चलो इनको छोड़कर पुलिस पर ही लिखता हूं लेकिन ठुल्ला या टूरिया लिख दिया तो... नही बाबा मैं इतना रिस्क नही ले सकता। परंतु लिखूं तो लिखूं किस पर, यह सोच-सोच कर अब दिमाग का रायता ही बन गया।
कुछ गलत लिख दिया हो तो क्षमा करें🙏 किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना मेरा कतई उद्देश्य नही हैं।
यह व्यंग्यात्मक लेख 18/08/2015 को शाम 6.20 पर लिखा गया था लेकिन किसी कारणवश प्रकाशित नही कर पाया इसलिए आज कर रहा हूं पर अब हम बदल गए हैं।😄
आप कुछ मदद कर सकते हैं की लिखूं तो किसपे लिखूं?
फिर मिलेंगे✍


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