रिश्वत ओर किस्मत!


नेताओं की कुर्सी हिलती, लोगों की जेब टंटोलती।
तूने मुझको रिश्वत खिलाई, मैंने तेरी नौकरी लगाई।। 

करता हूं मैं रोज सफाई, कहते हैं मुझे रिश्वतखोरी का भाई।
सुबह-सुबह मैं ऑफिस पहुंचा, आज रिश्वत को मैं तरसा।।

नही किसी से मैं हूं कम, रिश्वत दे-दे हो जा भस्म।
थोड़े-थोड़े दे-दे गाभा(वस्त्र), बन जा तू रामदेव का बाबा।।

लोगों से मैंने रिश्वत खाई, घर में ल्याओ एक लुगाई।
रिश्वत खाके बन गया भोगी, लोग कहते यह है जोगी।।

एक दिन ऐसो आयो मामलो, नही जानते तो जानलो।
नोटों में उसने रंग मिलाया, रिश्वत में मुझे रंगे हाथ फंसाया।।

ऑफिस पहुंची CBI, हाईकोर्ट ने जांच करवाई।
जांच में पाया दोषी, लोगों ने बनाया जोशी।।

विपक्षी गवाह बनके आए लोग, जिनकी खाई मैंने भोग।
पूछा मुझसे 1-2 साल, कितना हुआ तेरा काला माल।।

2-4 साल गया मैं पेशीे, जैसे आई घर मे ऐसी। 
हाईकोर्ट का फैसला आया, फांसी से मैें नही बच पाया।।

जेलर आया पुछी इच्छा, मैंने कहा था जब मैं बच्चा।
मां-बाप ने यही सिखाया, करनी है फेरबदल भाया।।

डॉक्टर ने मुझे किया चेक, मैंने अपना सामान किया पैक।
पढी मैंने रामायण और गीता, जैसे आई साथ में सीता।।

मैंने जिसकी रिश्वत खाई, निकला वो जेलर का भाई। 
तोड़े बटन के खिंचे बाल, जेलर ने उतारी मेरी खाल।।

नही खाता मैं रिश्वत, होती नही ऐसी मेरी किस्मत।।।

फिर मिलेंगे✍

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