गांव का पोस्टमार्टम




आज के समय में हर कोई अपनी पीठ थपथपा रहा है चाहे केंद्र में बैठी सरकार हो या पूर्व की सरकार या फिर राज्य सरकारें। हर कोई अपने कामों को बढ़ा-चढ़ाकर, प्रचार-प्रसार करके लोगों के दिलों पर राज करना चाहता है। एक तरह से हम यह कहें कि इन सब से हमें सम्मोहित करके अपने "वश" में करना चाहता है तो कोई गलत बात नहीं होगी।

आज किसान कण-कण के लिए मोहताज हो रहा है और यह लोग लाखों करोड़ों रुपए के विज्ञापनों पर खर्च कर रहे हैं। मैं यह सब लिखकर किसी भी सरकार पर कटाक्ष नहीं कर रहा हूं क्योंकि यह तो उनका काम है लेकिन जो लोगों की रोजमर्रा की जरूरत हैं उनका भी सरकारों को ध्यान रखना चाहिए। आज सरकार शौचालय की बात करती है, की हर घर में होना चाहिए। अच्छी बात है लेकिन उसमें डालने के लिए पानी भी होना चाहिए। यह भी उनको सोचना चाहिए।

आज के समय में गांवो की ऐसी स्थिति है कि पीने के लिए पानी नहीं है, काम करने के लिए रोजगार नहीं है। सरकारी सिस्टम एक तरह से "नकारा" हो गया है बल्कि यह हैं कि किसी काम का नहीं रहा है तो इसमें कोई दो राय नहीं है।

आज के समय में और खासकर गांवो में सरकारी नौकरी बस बैठे-बैठे पैसे हासिल करने का एक जरिया बन गई है, कोई समय पर और ढंग से काम ही नही करना चाहता। मैं इन सरकारी कर्मचारियों के बारे में ज्यादा नहीं कहूंगा पर जब तक गांव के "लोग" ही इन पर कारवाई नहीं करेंगे तो यह तो बैठे "मौज" ही करेंगे ना।

नेता बनना हो तो सब आगे आ जाते हैं, किसी को मारना हो धमकाना हो या फिर किसी की बुराई करनी हो तो लोग ज्यादा से ज्यादा इसमें सहयोग करते हैं पर जो काम जरूरी और सबके हित में होता है उसके लिए कोई आगे नहीं आता।

मैंने एक पैन कार्ड बनवाया था जो 31 तारीख को ही असावरी पोस्ट ऑफिस में आ गया था लेकिन इस गांव के "हाल" कहे लीजिए या फिर मेरी किस्मत क्योंकि अभी तक मुझे पैन कार्ड नहीं मिला है। मैंने कई बार कोशिश की, हर रोज डाकघर जाता हूं। कई लोग बैठे रहते हैं वहां पर, सारे दिन ताश के पत्ते खेल रहे होते हैं। कोई नहीं जानता कि डाकिया कब आता है कब चला जाता है लेकिन डाकघर के हालात पर कोई भी बात ही नहीं करता।

26 जनवरी हो या फिर 15 अगस्त, कुछ खास "नेता" स्कूल में गांव के हालात पर चिख-चिख के कहते हैं, मैं उन सब से भी कहना चाहूंगा कि किसी दिन 1-2 घंटे निकालकर गांव के हालात पर भी समीक्षा करें, उससे वह छोटे नहीं हो जाएंगे बल्कि दूसरों के मन की बात नहीं कहूंगा पर अपनी जरूर कहता हूं कि मेरी नजरों में वह "सफल नेता" जरूर बन जाएंगे।

मैं यहां किसी पर भी आरोप-प्रत्यारोप नही लगा रहा हूं बस अपने मन की बात रख रहा हूं, जो मेरी बात से सहमत हैं, वह रहे हैं और जो सहमत नही है, बस वह नही है, हम क्या कर सकते हैं।

      ।।जय हिंद जय भारत।।

फिर मिलेंगे✍

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